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दो भाइओं अरबाज खान और सोहैल खान के आपसी टकराहट की कहानी है किसान एक भाई शहर का है तो एक गांव का किसान है। किसान को अपनी जमीन प्यारी है वहीं शहरी भाई जमीन को बेकार की चीज समझता है और उसे बेचना चाहता है। इन दोनों भाइओं की आपसी टकराहट में पिता असहाय है।
फिल्म में मार धाड़, रोमांस, कामेडी सभी का भरा हुआ है लेकिन फिल्म में मुख्या मुद्दा किसानों की असली समस्या पेश नहीं कर सके निर्देशक पुनीत सिरा हर साल देश में लोखो किसान सूखे व अन्य वजहों से मर रहें है लेकिन फिल्म इन सभी से कोसो दूर है |
किसान में केवल कहानी को दिखलाया आचे से गया है फिल्म में कुछ भी एसा नहीं है की फिल्म को देखने जाया जाए। अगर किसान फिल्म देखनी हाय तो कोई भी पुरानी फिल्म देखना बेहतर होगी फिल्म में कोई भी संदेश नहीं है |
कहा जाए तो फिल्म ने अपने नाम की कोई भी चीज़ नहीं दिखलाई | सिनेमा हॉल में जा कर ये फिल्म देखना समय और रुपयों की बर्बादी कही जा सकती है |
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आदित्य कश्यप
स्मार्ट बॉलीवुड